शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2013

रवांई कल आज और कल के इस बार के अंक पढें

रवांई कल आज और कल के इस बार के अंक पढें

मंगलवार, 1 अक्टूबर 2013

बच्चों ने खेल खेल में सीखे विज्ञान के गूढ़ रहस्य!

  • चार दिन की कार्यशाला में ही बच्चे समझने लगे विज्ञान के टेड़े सवाल !!
  • विजेन्द्र रावत
नौगाँव (उत्तरकाशी)। में हमारी संस्था सामाजिक एवं पर्यावरणीय कल्याण समिति (सेवा) ने कक्षा 6  से लेकर 8  तक के 11  स्कूलों के 101  बच्चों के लिए  "अनुभव के आधार पर विज्ञान कार्यशाला" का आयोजन किया। मैं चार दिन के इस शिविर में बच्चों में आये परिवर्तन पर चकित था . शिविर के पहले दिन गुम शुम से रहने वाले ग्रामीण स्कूलों से आये बच्चे समापन के दिन जिस बिंदास ढंग से अपने आप को प्रस्तुत कर रहे थे उससे उनके अविभावक व शिक्षक दोनों ही बेहद खुश दिखे।
कार्यशाला में मॉडल बनाते बच्चे
 
इस कार्यशाला का आयोजन यूकास्ट, उत्तराखंड, प्रथम एजुकेशन फ़ाउन्डेशन, नई दिल्ली एवं सेवा संस्था (नौगाँव) के संयुक्त प्रयास से किया गया जिसमें प्रथम के युवा वैज्ञानिकों ने बच्चों को मनोवैज्ञानिक ढंग से खेल खेल में कंकाल तंत्र, हवाई जहाज की बनावट व अन्तरिक्ष विज्ञान जैसे पेचीदा रहस्यों को माडल बनाकर बेहद ही सरल ढंग से समझाया और बच्चों ने इस अध्ययन का खूब लाभ उठाया।इनके माडल बच्चों ने खुद ही तैयार किये व उनके बारे में सीख कर एक दूसरे में अपना ज्ञान बांटा भी.
 बच्चे अपने नर कंकाल मॉडल के साथ
यूकोस्ट के अध्यक्ष डा. राजेन्द्र डोभाल चाहते थे कि विज्ञान की इस शिक्षा की रोशनी उन दूरदराज के बच्चों तक पहुंचाई जाए जहां हर सुविधा का घोर अभाव है.
हम भी इस बात को लेकर चिंतित थे कि कैसे यमुना व टौंस घाटी के सुदूर गाँव फते पर्वत, पंचगाई, बडासू व गीठ जैसे पिछड़े इलाकों के बच्चों को इस प्रकार की आधुनिक शिक्षा से जोड़ा जाए? 
देश भर में अनुभव आधारित विज्ञान की शिक्षा देने वाले प्रथम संस्था के युवा वैज्ञानिक यहाँ के बच्चों के सीखने की ललक को देखकर अचम्बित थे उनका मत था कि यहाँ के बच्चों में शहरों के महगें अंग्रेजी स्कूलों के बच्चों से कहीं ज्यादा प्रतिभा है यदि इनको, उनके मुकाबले आधी सुविधा भी मिल जाए तो ये उन्हें काफी पीछे छोड़ जायेंगे।
कार्यशाला के बारे में अपने अनुभव बांटता एक छात्र

 
अब "सेवा" अपने इस अभियान को दूर दराज के स्कूलों तक ले जाने के अभियान में जुटी है और अब अगला पड़ाव बडकोट, पुरोला, मोरी, जखोल, लिवाड़ी, राना व खरसाली जैसे दूर दराज के स्कूलों में होगा।

सोमवार, 30 सितंबर 2013

विज्ञान के मॉडल देख चमत्कृत हुए लोग

  • दूर-दराज के स्कूलों में भी आयोजित होंगे विज्ञान शिविर

नौगांव। यहां अनुभव आधारित बाल विज्ञान कार्यशाला में बच्चों द्वारा बनाये गये विज्ञान मॉडलों को देखकर उनके शिक्षक व अभिभावक चमकृत हो गये।
छोटे-छोटे स्कूली बच्चों ने चार दिवसीय इस कार्यशाला में कागज के कंकाल तंत्र, फलाइट व स्ट्रोनॉमी (सूर्य, चांद व पृथ्वी) के मॉडल तैयार किये और उसके बाद उन्हें पेंटिंग के रूप में पेंसिल और रंगों की मदद से कागज पर भी उतारा।

इस विज्ञान शिविर का आयोजन सामाजिक एवं पर्यावरणीय कल्याण समिति (सेवा) ने प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन, नई दिल्ली व विज्ञान व तकीनीकी परिषद (यूकोस्ट) के सहयोग से यमुना वैली पब्लिक स्कूल नौगांव में किया गया। इसमें नौगांव के आसपास के 11 स्कूलो के 101 छात्रों ने हिस्सा लिया जो कक्षा 6 से कक्षा 8 तक के हैं।

प्रतिभागी छात्रो का कहना है कि खेल-खेल में विज्ञान को सीखने से हमें पता ही नहीं चलता है कि समय कैसे गुजर गया। उनका कहना था कि यदि इस तरह अन्य विषयों की भी पढ़ाई हो तो कोई बच्चा पढ़ाई में कमजोर नहीं रह सकता।

संस्था के सचिव शशि मोहन रावत ने बताया कि इस प्रकार की कार्यशाला इस पिछड़े क्षेत्र के नैनबाग, बड़कोट, पुरोला, मोरी, जखोल, रानाचट्टी तथा लिवाड़ी-फेताड़ी जैसे दूर दराज के स्कूलों में भी आयोजित की जायेंगी। जहां आज भी पहुंचने के लिए दो दिन का पैदल सफर है।

संस्था के संयोजक एवं वरिष्ठ पत्रकार विजेन्द्र रावत ने यूकॉस्ट उत्तराखण्ड, का आभार वक्‍त करते हुए कहा कि यूकॉस्‍ट के अध्यक्ष राजेन्द्र डोभाल ने रवांई-जौनपुर व जौनसार-बावर जैसे पिछड़े क्षेत्रों में बच्चों में विज्ञान प्रतिभा के विकास के लिए एलांयस फॉर साइंस जैसे स्तरीय कार्यक्राम के आयोजन में मदद दी।

प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन, नई दिल्ली के टीम लीडर महेश पोखरिया ने बताया कि यहां के बच्चों में विज्ञान को सीखने की जितनी अधिक जिज्ञासा है उतनी जिज्ञासा शहरों के सुविधा सम्पन्न अंग्रेजी स्कूलों के बच्चों में नहीं है। यही कारण है कि ये अपेक्षाकृत तेजी से सीख रहे हैं। संस्था की योजना है कि इस पिछड़े क्षेत्रों में भविष्य में संस्था विज्ञान मेलों का आयोजन भी करेगी। ताकि छात्रों में विज्ञान के प्रति रूचि पैदा हो सके।

बुधवार, 5 जून 2013

विश्‍व पर्यावरण दिवस 2013

विश्‍व पर्यावरण दिवस 2013


गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

सोमवार, 25 फ़रवरी 2013

चिंतन शिविर में की रवाईं घाटी के विकास पर चर्चा

नौगांव(उत्तरकाशी)। सामाजिक एवं पर्यावरणीय कल्याण समिति की ओर से रवाईं घाटी के विकास को लेकर चिंतन शिविर आयोजित किया गया। इस मौके पर ‘रवाईं आज और कल’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
शिविर में मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री नारायण सिंह राणा ने कहा कि रवाईं जौनपुर की संस्कृति की अलग पहचान है। क्षेत्र में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उन्हें आगे आने का मौका मिलना चाहिए। क्षेत्र के विकास तथा दशा-दिशा को लेकर इस तरह के चिंतन शिविर समय-समय पर आयोजित होने चाहिए। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सकल चंद रावत ने कहा कि वर्तमान में जनता के साथ ही स्थानीय संस्कृति का भी पलायन हो रहा है। इसे संरक्षित रखने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। शिविर में जौनपुर की उभरती गायिका रेशमा शाह एवं सुनील बेसारी की टीम में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार विजेंद्र रावत के संरक्षण में तैयार हुई ‘रवाईं आज और कल’ पुस्तक का विमोचन किया गया। जिसमें क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति के साथ ही क्षेत्र से जुड़ी अन्य जानकारियों को शामिल किया गया है। शिविर में रवाईं घाटी की उभरती प्रतिभाओं को सम्मानित भी किया गया। इस मौके पर समिति की अध्यक्ष उर्मिला चंद, शशि मोहन रावत, पूर्व डीआईजी एसपी चमोली, अमर सिंह कफोला, अनुपमा रावत, यशोदा नौटियाल, अंबिका चौहान, सीमा रावत भी मौजूद थे।
साभार : अमर उजाला 
http://www.amarujala.com/news/states/uttarakhand/uttarkashi/Uttar-Kashi-59224-17/

सोमवार, 18 फ़रवरी 2013