मंगलवार, 20 दिसंबर 2011

पर्यावरण को बचायें, इको-फ्रेंडली कप अपनाएं

हेल्लो दोस्तों पिछले कुछ दिनों पहले गाँव से लौटा हूँ. गाँव में ४ शादियाँ थी. कई दिन से सोच रहा था कि ये बातें आप लोगों के साथ शेयर करूँ. लेकिन वक्त नहीं मिल पाया. आज अपने कुछ मित्रों के साथ बैठा था तो बात चली कि शादी-ब्याह में जो डिस्पोजल गिलास प्रयोग होते हैं, वो प्लास्टिक और थर्माकोल के होते हैं. क्यों ना उनके जगह कुछ इको-फ्रेंडली कप यूज किये जायें. चर्चा चली तो एक मित्र ने बताया कि आजकल मार्केट में कुछ एको-फ्रिनडली कप आ गए हैं क्यों ना उनका यूज किया जाय. इसी प्रयास के साथ आप लोगों के बीच सामाजिक एवं पर्यावरण कल्याण समिति (सेवा) के तहत हम जागरूक करने की कोशिश करेंगे कि लोग शादी-ब्याह में इन इको-फ्रेंडली कप का प्रयोग करें.
मित्रों की राय आमंत्रित है. आप लोग इस बारे में कुछ ओर बेहतर सुझाव दें. ताकि हम अपने इस प्रयास को आगे बढ़ा सकें. आशा है आप लोगों का सहयोग मिलेगा.

शुक्रवार, 29 जुलाई 2011

विभिन्‍न प्रजातियों के 200 पौधे लगाए

संस्‍था की अध्‍यक्ष के साथ स्‍कूली बच्‍चे व संस्‍था के कार्यकर्ता

नौगांव (उत्तरकाशी)। श्रीदेव सुमन दिवस के अवसर पर सामाजिक एवं पर्यावरणीय कल्‍याण समिति (सेवा) द्वारा ग्राम सभा नैंणी में जागृति पब्लिक स्‍कूल के सहयोग से विभिन्‍न प्रजातियों के 200 पौधे लगाए (रोपे) गए। इस अवसर पर श्रीदेव सुमन जी के संघर्षमयी जीवन पर प्रकाश डाला गया।

मुंगरसंती रेंज के रेंज अधिकारी नीलम दास (बाएं) एवं नौगांव रेंज के रेंज अधिकारी किशन लाल (बीच में) वृक्षारोपण करते हुए।


कार्यक्रम के लिए बतौर मुख्‍य अतिथि मुंगरसंती रेंज के रेंज अधिकारी श्री नीलम दास एवं नौगांव रेज के रेंज अधिकारी किशन लाल द्वारा विभिन्‍न प्रजातियों के पौधे उपलब्‍ध करवा कर वृक्षारोपण में संपूर्ण स्‍टॉफ सहित भागीदारी दी गई। इस अवसर पर श्री दास ने कहा कि वृक्ष लगाकर हम समाज के लिए संजीवनी का कार्य कर रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि यदि पर्यावरण को सुरक्षित रखना है तो हमें अधिक से अधिक पेड़ (वृक्ष) लगाने होंगे तथा उनकी सुरक्षा करनी होगी।

अपने स्‍टॉफ के साथ दोनों रेंज अधिकारी व जागृति पब्लिक स्‍कूल के प्रधानाचार्य।


इस अवसर पर नौगांव रेंज अधिकारी रेंज किशन लाल ने 'पादप हूं हे मानव' कविता और वृक्षों के लाभ के बारे में बताया। उन्‍होंने कहा कि वृक्षों से हमें फल-फूल, छाया, कपड़े, कागज व दैनिक उपभोग की आवश्‍यकताओं की पूर्ति हेतु समस्‍त सामान मिलता है। ये भूक्षरण को रोकने में भी सहायक होते हैं। इन प्रत्‍यक्ष लाभों के अतिरिक्‍त हमें अप्रत्‍यक्ष लाभ मिलते हैं। अत: क्‍यों न हम वृक्ष लगाकर इस धरती को हरा-भरा कर दें। व इस धरा को प्रदूषण से मुक्‍त करने के साथ ही लगाये गये वृक्षों की संपूर्ण सुरक्षा के उत्‍तरदायित्‍व के लिए प्रत्‍येक मनुष्‍य को जागरूक होना चाहिए।

इस अवसर पर संस्‍था की अध्‍यक्ष श्रीमती उर्मिला चंद ने कहा कि वृक्ष हमारी मूलभूत आवश्‍यकता हो गई है। वृक्ष लगाना व उनकी सुरक्षा करना प्रत्‍येक व्‍यक्ति का कर्तव्‍य है। जिससे हमें शुद्ध हवा, स्‍वच्‍छ वातावरण, जल, लकड़ी आदि मिलती है।

जागृति पब्लिक स्‍कूल के प्रधानाचार्य श्री जयवीर चंद ने कहा कि वृक्षों पर हमारा जीवन निर्भर है। हमें जनसंख्‍या को कम करने तथा वृक्षों की संख्‍या बढ़ाने पर ध्‍यान देना चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन संस्‍था के सचिव शशिमोहन रावत 'पहाड़ी' ने किया। इस अवसर डॉ. विरेन्‍द्र चंद, देवेन्‍द्र चंद, केदार सिंह, सरदार रावत, रणजीत चंद व ग्रामसभा के कई गणमान्‍य व्‍यक्ति उपस्थित थे।

मंगलवार, 5 जुलाई 2011

ऐसे होता है पौधों के परिवार का जन्म

लंबी जद्दोजहद के बाद आखिर वैज्ञानिकों ने इस रहस्य से पर्दा उठा ही दिया कि स्वतः उगने वाले पौधों में उनके परिवार का प्रसार कैसे होता है। शोधकर्ताओं के समूह ने पौधों की उस प्रणाली का पता लगाया है, जिसमें वे एक पौधे से अनेक पौधों के रूप में फैलते चले जाते हैं।
नर फूलों में होता है कोशिकीय अंडाणु
हॉवर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के मुताबिक स्वतः उगने वाले पौधों के फूलों में एक कोशिकीय अंडाणु होता है। यह कोशिकीय अंडाणु नर फूल में छिपा होता है। जब हवा चलती है तो यह अंडाणु मादा फूलों के संपर्क में आता है। मादा फूल से मिलने के बाद इनके संयोग से फूल के बीजों पर एक आवरण चढ़ जाता है। जब यह बीज भूमि पर गिरते हैं तो अन्य पौधों का जन्म होता है।
विविधता को समझने में अहम है रिसर्च
प्रोसिडिंग ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस में प्रकाशित इस रिसर्च में बताया गया है कि इस कोशिकीय अंडाणु का निर्माण हर फूल में नहीं होता। केवल कुछ फूलों में ही ये अंडाणु होते हैं। शोधकर्ताओं के मुताबिक जैसे ही नर फूल के अंडाणु मादा फूलों के संपर्क में आते हैं तो अन्य पौधों के उपजने के लिए अन्य बीजों का निर्माण हो जाता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि यह रिसर्च पौधों में विविधता के लिए काफी महत्वपूर्ण है।

साभार : अमर उजाला कॉम्पेक्ट

गुरुवार, 16 जून 2011

बाबा नीब करौरी आश्रम में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

  • बाबा के जयकारों के बीच कैंची में 80 हजार श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
भवाली (नैनीताल)। बाबा नीब करौरी महाराज आश्रम (कैंची धाम) में बुधवार को आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। आश्रम के वार्षिकोत्सव पर बाबा के जयकारों के बीच देश-विदेश से आए 80 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा की प्रतिमा के दर्शन और प्रसाद ग्रहण कर खुद को धन्य किया। इस बार वार्षिकोत्सव पर चंद्रग्रहण के चलते पौने तीन बजे ही मंदिर के कपाट बंद कर दिए गए।
आश्रम में हर साल 15 जून को प्रतिष्ठा दिवस मनाया जाता है। बुधवार को भी तड़के पांच बजे मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों-श्रद्धालुओं ने मंदिर में पूजा अर्चना के बाद ढोल नगाड़ों के साथ मंदिर परिसर स्थित देवताओं को प्रसाद का भोग लगाया। इसके बाद 6:30 बजे से मंदिर के कपाट खोल दिए गए। दो बजे मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों, खुफिया तंत्र और पुलिस अधिकारियों ने लगभग 80 हजार श्रद्धालुओं के मंदिर में पहुंचने की पुष्टि की।
साभार : अमर उजाला

बुधवार, 8 जून 2011

पर्यावरण बचाने के लिए हिमालय के संरक्षण पर जोर

नौगांव (उत्तरकाशी)। सामाजिक एवं पर्यावरण कल्याणसमिति द्वारा ‘पर्यावरण, प्राकृतिक आपदा एवं विकास’ विषय पर आयोजित विचार गोष्ठी में हिमालय के संरक्षणपर जोर दिया गया।
गोष्ठी में मुख्य अतिथि डीएवी कालेज देहरादून के प्राचार्यप्रो.एपी जोशी ने कहा कि जंगलों के अंधाधुंध कटान सेपर्यावरण प्रभावित हो रहा है। जल, जंगल व जमीन के संरक्षण के साथ ही पर्यावरण के प्रति संवेदनशील होने कीजरूरत है। वरिष्ठ पत्रकार चारू चंद्र तिवारी ने कहा कि वन एवं पर्यावरण को बचाने में ग्रामीणों की भूमिकामहत्वपूर्ण है।विधायक किशोर उपाध्याय ने पर्यावरण संरक्षण के लिए महिला संगठनों को जागरूक करने पर जोरदिया। दूरदर्शन के पूर्व संपादक राजेंद्र धस्माना, पत्रकार विजेंद्र रावत, दिनेश जोशी, शांति ठाकुर आदि ने पर्यावरणसंरक्षण के लिए ‘अपना गांव-अपना वन’ की अवधारणा के साथ लोगों को जागरूक करने की बात कही। इस मौकेपर समिति के सचिव शशिमोहन, डा. विरेंद्र चंद्र, डा. रश्मि चंद्र, डा. बचन रावत, रमेश रावत, नगर पंचायत अध्यक्षबुद्धि सिंह रावत, सकल चंद रावत, केंद्र सिंह राणा, आनंदी राणा आदि मौजूद थे। गोष्ठी का संचालन प्रमोद रावत ने किया।
साभार : अमर उजाला
http://www.amarujala.com/city/Utter%20Kashi/Utter%20Kashi-17133-17.html