सोमवार, 30 सितंबर 2013

विज्ञान के मॉडल देख चमत्कृत हुए लोग

  • दूर-दराज के स्कूलों में भी आयोजित होंगे विज्ञान शिविर

नौगांव। यहां अनुभव आधारित बाल विज्ञान कार्यशाला में बच्चों द्वारा बनाये गये विज्ञान मॉडलों को देखकर उनके शिक्षक व अभिभावक चमकृत हो गये।
छोटे-छोटे स्कूली बच्चों ने चार दिवसीय इस कार्यशाला में कागज के कंकाल तंत्र, फलाइट व स्ट्रोनॉमी (सूर्य, चांद व पृथ्वी) के मॉडल तैयार किये और उसके बाद उन्हें पेंटिंग के रूप में पेंसिल और रंगों की मदद से कागज पर भी उतारा।

इस विज्ञान शिविर का आयोजन सामाजिक एवं पर्यावरणीय कल्याण समिति (सेवा) ने प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन, नई दिल्ली व विज्ञान व तकीनीकी परिषद (यूकोस्ट) के सहयोग से यमुना वैली पब्लिक स्कूल नौगांव में किया गया। इसमें नौगांव के आसपास के 11 स्कूलो के 101 छात्रों ने हिस्सा लिया जो कक्षा 6 से कक्षा 8 तक के हैं।

प्रतिभागी छात्रो का कहना है कि खेल-खेल में विज्ञान को सीखने से हमें पता ही नहीं चलता है कि समय कैसे गुजर गया। उनका कहना था कि यदि इस तरह अन्य विषयों की भी पढ़ाई हो तो कोई बच्चा पढ़ाई में कमजोर नहीं रह सकता।

संस्था के सचिव शशि मोहन रावत ने बताया कि इस प्रकार की कार्यशाला इस पिछड़े क्षेत्र के नैनबाग, बड़कोट, पुरोला, मोरी, जखोल, रानाचट्टी तथा लिवाड़ी-फेताड़ी जैसे दूर दराज के स्कूलों में भी आयोजित की जायेंगी। जहां आज भी पहुंचने के लिए दो दिन का पैदल सफर है।

संस्था के संयोजक एवं वरिष्ठ पत्रकार विजेन्द्र रावत ने यूकॉस्ट उत्तराखण्ड, का आभार वक्‍त करते हुए कहा कि यूकॉस्‍ट के अध्यक्ष राजेन्द्र डोभाल ने रवांई-जौनपुर व जौनसार-बावर जैसे पिछड़े क्षेत्रों में बच्चों में विज्ञान प्रतिभा के विकास के लिए एलांयस फॉर साइंस जैसे स्तरीय कार्यक्राम के आयोजन में मदद दी।

प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन, नई दिल्ली के टीम लीडर महेश पोखरिया ने बताया कि यहां के बच्चों में विज्ञान को सीखने की जितनी अधिक जिज्ञासा है उतनी जिज्ञासा शहरों के सुविधा सम्पन्न अंग्रेजी स्कूलों के बच्चों में नहीं है। यही कारण है कि ये अपेक्षाकृत तेजी से सीख रहे हैं। संस्था की योजना है कि इस पिछड़े क्षेत्रों में भविष्य में संस्था विज्ञान मेलों का आयोजन भी करेगी। ताकि छात्रों में विज्ञान के प्रति रूचि पैदा हो सके।

बुधवार, 5 जून 2013

विश्‍व पर्यावरण दिवस 2013

विश्‍व पर्यावरण दिवस 2013


गुरुवार, 28 फ़रवरी 2013

सोमवार, 25 फ़रवरी 2013

चिंतन शिविर में की रवाईं घाटी के विकास पर चर्चा

नौगांव(उत्तरकाशी)। सामाजिक एवं पर्यावरणीय कल्याण समिति की ओर से रवाईं घाटी के विकास को लेकर चिंतन शिविर आयोजित किया गया। इस मौके पर ‘रवाईं आज और कल’ पुस्तक का विमोचन भी किया गया।
शिविर में मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री नारायण सिंह राणा ने कहा कि रवाईं जौनपुर की संस्कृति की अलग पहचान है। क्षेत्र में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उन्हें आगे आने का मौका मिलना चाहिए। क्षेत्र के विकास तथा दशा-दिशा को लेकर इस तरह के चिंतन शिविर समय-समय पर आयोजित होने चाहिए। पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सकल चंद रावत ने कहा कि वर्तमान में जनता के साथ ही स्थानीय संस्कृति का भी पलायन हो रहा है। इसे संरक्षित रखने के लिए सामूहिक प्रयास करने होंगे। शिविर में जौनपुर की उभरती गायिका रेशमा शाह एवं सुनील बेसारी की टीम में रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस मौके पर वरिष्ठ पत्रकार विजेंद्र रावत के संरक्षण में तैयार हुई ‘रवाईं आज और कल’ पुस्तक का विमोचन किया गया। जिसमें क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति के साथ ही क्षेत्र से जुड़ी अन्य जानकारियों को शामिल किया गया है। शिविर में रवाईं घाटी की उभरती प्रतिभाओं को सम्मानित भी किया गया। इस मौके पर समिति की अध्यक्ष उर्मिला चंद, शशि मोहन रावत, पूर्व डीआईजी एसपी चमोली, अमर सिंह कफोला, अनुपमा रावत, यशोदा नौटियाल, अंबिका चौहान, सीमा रावत भी मौजूद थे।
साभार : अमर उजाला 
http://www.amarujala.com/news/states/uttarakhand/uttarkashi/Uttar-Kashi-59224-17/

सोमवार, 18 फ़रवरी 2013

मंगलवार, 2 अक्टूबर 2012

बच्चों को बताए वैज्ञानिक अनुभव



नौगांव, जागरण प्रतिनिधि : सामाजिक एवं पर्यावरण कल्याण समिति सेवा की ओर से स्कूली बच्चों को चार दिवसीय कार्यशाला में अनुभव से विज्ञान के रहस्यों से परिचित कराया गया। यमुना वैली पब्लिक स्कूल में आयोजित कार्यशाला में प्रखंड के दस स्कूलों के नब्बे बच्चों ने शिरकत की।
कार्यशाला में छठी, सातवीं व आठवीं कक्षा के बच्चों को विशेषज्ञों ने आम दिनचर्या में होने वाले विभिन्न अनुभवों को विज्ञान के जरिये बच्चों के सामने प्रस्तुत किया। वहीं बच्चों को विभिन्न घटनाओं और अनुभवों के वैज्ञानिक आधार से भी रूबरू कराया। सेवा के सचिव शशिमोहन रावत ने बताया कि देश में शिक्षा क्षेत्र की शीर्ष संस्था प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के विज्ञान जागरुकता कार्यक्रम के तहत बच्चों में विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के ऐसे प्रयास उनकी संस्था की ओर से समय समय पर आगे भी किए जाते रहेंगे। कार्यशाला में राजकीय इंटर कालेज नौगांव, दौलतराम रंवाल्टा, सरस्वती विद्या मंदिर, बाल विद्या मंदिर, उमा, विद्यालय नौगांव, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय धारीवली, राजकीय कन्या जूनियर हाईस्कूल कोटियाल गांव, कन्या जूनियर हाईस्कूल मुराड़ी राकउमावि मंजियाली, सरस्वती इंटर कालेज नौगांव तथा राजकीय इंटर कालेज मुंगरा नौगांव सहित दस विद्यालयों की जूनियर कक्षाओं के बच्चों ने शिरकत की। समापन अवसर पर बच्चों को प्रमाण पत्र भी वितरित कि ये गये। क्षेत्र में पहली बार हो रही अनुभव आधारित बाल विज्ञान कार्यशाला के संचालन के लिए नई दिल्ली से चार सदस्यीय टीम के साथ यहां पहुंचे आशुतोष उपाध्याय ने बताया कि उनकी संस्था ने उलतराखंड में विज्ञान को लोकप्रिय बनाने कि लिए विशेष पहल शुरू की है। इसके अंर्तगत अनुभव आधारित वाल विज्ञान कार्यशालाएं, विशेष विज्ञान मेले, साइंस कैम्प तथा विज्ञान शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम किये जाते है।

साभार : दैनिक जागरण 
http://www.jagran.com/uttarakhand/uttarkashi-9716630.html

बच्चों ने अनुभव से सीखा विज्ञान

‘सेवा’ और ‘प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन’ की चार दिवसीय अनुभव आधारित 
बाल विज्ञान कार्यशाला की रि‍पोर्ट-


नौगाँव (उत्‍तरकाशी)। अनुभव से विज्ञान के रहस्यों से परिचित कराने के लिये समाजिक एवं पर्यावरण कल्याण समिति (सेवा) तथा ‘प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन’ ने यमुना वैली पब्लिक स्कूल में 26 सि‍तम्‍बर 2012 से चार दिवसीय बाल विज्ञान कार्यशाला का आयोजन कि‍यात्र कार्यशाला में नौगाँव क्षेत्र के दस विद्यालयों के 90 से ज्यादा बच्चों ने हिस्सादारी की। छठी, सातवीं व आठवीं कक्षा के इन बच्चों ने विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से उनकी कक्षाओं में पढ़ाए जाने वाले विज्ञान के चार शीर्षकों को प्रयोगों से किये जाने वाले अनुभवों से समझने का प्रयास किया। प्रकृति अन्वेषण, हवा के गुण, चुंबक व चुंबकत्व तथा सूक्ष्मजीवियों की दुनिया जैसे बुनियादी विषयों को विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से सीखना-समझना इन बच्चों के लिए बेहद रोमांचकारी अनुभव था।
‘सेवा’ के सचिव शशिमोहन रावत ने बताया कि देश में शिक्षा क्षेत्र की शीर्षस्थ संस्था ‘प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन’ के एसायंस फॉर साइंस कार्यक्रम के तहत बच्चों में विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के ऐसे प्रयास उनकी संस्था की ओर से आगे भी किए जाते रहेंगे।
बाल विज्ञान कार्यशाला में राजकीय इंटर कालेज नौगांव, दौलतराम रवांल्टा सरस्वती विद्या मंदिर, बाल विद्या मंदिर उ.मा. विद्यालय नौगाँव, राज. उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कीमी, राज. उच्च प्राथमिक वि. धारीवली, रा. कन्या जूनियर हाईस्कूल कोटियालगाँव, कन्या जूनियर हाईस्कूल मोराड़ी, रा.क.उ.मा.वि. मजियाली, सरस्वती इंटर कालेज नौगाँव तथा राजकीय इंटर कालेज मुंगरा-नौगाँव सहित 10 विद्यालयों की जूनियर कक्षाओं के बच्चों ने शिरकत की। कार्यशाला के समापन समारोह में बच्चों को आयोजकों की ओर से प्रमाणपत्र भी वितरित किये गये। कबाड़ और बेकार समझी जाने वाली वस्तुओं से प्रयोग कर विज्ञान को पहली बार अनुभव और गतिविधियों के माध्यम से सीख रहे ये बच्चे कार्यशाला में हिस्सेदारी से बेहद रोमांचित नजर आए।
नौगाँव क्षेत्र में पहली बार हो रही अनुभव आधारित बाल विज्ञान कार्यशाला के संचालन के लिए नई दिल्ली से चार सदस्यीय टीम के साथ यहाँ पहुँचे एलायंस फॉर साइंस के संयोजक आशुतोष उपाध्याय ने बताया कि उनकी संस्था ने उत्तराखंड में विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के लिए विशेष पहल शुरू की है। इसके अंतर्गत अनुभव आधारित बाल विज्ञान कार्यशालाएं, विशेष विज्ञान मेले, साइंस कैम्प तथा विज्ञान शिक्षक प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रम किये जाते हैं। उन्‍होंने बताया कि एनसीईआरटी ने निर्देशों के अनुसार विज्ञान शिक्षा को गतिविधि आधारित किया जाना जरूरी है लेकिन ऐसी शिक्षण पद्धति के बारे में फिलहाल जानकारी की बेहद कमी है। उन्होंने बताया कि उनकी संस्था ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से उपलब्ध होने वाली सामग्री की मदद से विज्ञान संबंधी मॉडल बनाने के लिये शिक्षण प्रशिक्षण कार्यशालाएं भी आयोजित कर रही है। उन्होंने बताया कि ऐसी ही एक विज्ञान शिक्षक प्रशिक्षण कार्यशाला पिछले सप्ताह डायट डीडीहाट में आयोजित की गई, जिसमें पिथौरागढ़ जिले के राजकीय विज्ञान शिक्षकों ने भागीदारी की।
 साभार :  लेखक मंच 
 http://lekhakmanch.com/?p=4563