मंगलवार, 30 सितंबर 2014
गुरुवार, 18 सितंबर 2014
साथियो जैसा कि आपको विदित है कि पिछले कई महिनों से हम एक दस्तावेज को बनाने में लगे हुए थे और आज आप सभी साथियों, अग्रजों और बड़े भाइयों के सहयोग से यह कार्य पूर्ण हुआ है। रवांई—जौनपुर एवं जौनसार—बावर: कल, आज और कल नामक यह दस्तावेज प्रिटिंग के लिए चला गया है। सोमवार—मंगलवार तक यह आपके समक्ष एक किताब के रूप में उपलब्ध हो जाएगा। जल्द ही यह दस्तावेज लांच होगा। हमारे कोशिश है कि इस दस्तावेज को रवांई—जौनपुर एवं जौनसार—बावर में अलग—अलग तिथियों को लांच किया जाएगा। मुझे पूर्ण विश्वास है कि यह दस्तावेज हमारे लोगों के लिए जानकारीपरक सिद्ध होगा।
— आपका
शशि मोहन रवांल्टा
mysewa@gmail.com
रविवार, 1 दिसंबर 2013
चार दिवसीय अनुभव आधारित कार्यशला
सामाजिक पर्यावरणीय कल्याण समिति सेवा एवं यूकॉस्ट उत्तराखण्ड के तत्वाधान से आयोजित चार दिवसीय (30 नवंबर से 3 दिसंबर 2013) अनुभव आधारित कार्यशला का शुभारम्भ जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नारायण सिंह चैहान एवं श्री ए0एस0 तोमर प्रधानाचार्य रा0इ0कालेज डामटा ने दीप प्रज्वलित कर किया। कार्यषाला में 4 विद्यालय से के 140 बच्चों ने प्रतिभाग लिया कार्यषाला में विभिन्न विद्यालयों के प्रधानाचार्यो एवं डामटा क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों ने प्रतिभाग किया।
मुख्य अतिथि श्री नारायण सिंह चैहान एवं प्रधानाचार्य ने उत्तरकाशी के सबसे दूर स्थित इण्टर कालेज जिसमें कि 99 प्रतिशत छात्र/छात्रायें अनु0जाति, अनु0जनजाति एवं पिछडी जाति के अध्ययनरत हैं कार्यशाला का आयोजन करने के लिये सामाजिक एवं पर्यावरणीय कल्याण समिति को धन्यवाद देते हुये कहा कि संस्था ने उन छात्र/छात्राओं की ओर ध्यान दिया जो वास्तव में पिछड़े हुये हैं तथा जिन्हें वास्तव में इस प्रकार के कार्यक्रम की आवश्कता है। उन्होंने 'सेवा' को प्रत्येक 6 माह में डामटा में कार्यशाला का आयोजन करने का अनुरोध किया।
उपाध्यक्ष श्री शोभेन्द्र सिंह राणा ने आस्वस्थ किया कि सेवा समिति का उद्देश् ही उत्तराखण्ड के दुर्गम व पिछडे क्षेत्रों में कार्य करते हुये उन लोगों तक विकास की योजना पहुचाना है जो विकास से वंचित हैं। इससे पूर्व भी समिति ने यमुना वैली पब्लिक स्कूल, नौगांव व राजकीय इण्टर कालेज, खरादी में इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन विगत 3 वर्षों से करती आ रही है।
प्रथम एजुकेशन फाउण्डेशन एलायन्स फॉर साइन्स के संयोजक श्री आशुतोष उपाध्याय जी ने बताया कि विज्ञान को भाषा की तरह नहीं बल्कि अनुभव करके सीखा जा सकता है।
कार्यशाला में श्री यशवंत काला, श्रीमती दुग्रेशनन्दनी यादव, श्री सूरत सिंह अधिकारी, श्री दिनेश डोभाल, श्री सरदार सिंह राणा, श्री सुमारी, श्री विरेन्द्र रावत, श्री नारायण राणा तथा प्रथम एजुकेशन की सात सदस्यी टीम ने प्रतिभाग किया।
मुख्य अतिथि श्री नारायण सिंह चैहान एवं प्रधानाचार्य ने उत्तरकाशी के सबसे दूर स्थित इण्टर कालेज जिसमें कि 99 प्रतिशत छात्र/छात्रायें अनु0जाति, अनु0जनजाति एवं पिछडी जाति के अध्ययनरत हैं कार्यशाला का आयोजन करने के लिये सामाजिक एवं पर्यावरणीय कल्याण समिति को धन्यवाद देते हुये कहा कि संस्था ने उन छात्र/छात्राओं की ओर ध्यान दिया जो वास्तव में पिछड़े हुये हैं तथा जिन्हें वास्तव में इस प्रकार के कार्यक्रम की आवश्कता है। उन्होंने 'सेवा' को प्रत्येक 6 माह में डामटा में कार्यशाला का आयोजन करने का अनुरोध किया।
उपाध्यक्ष श्री शोभेन्द्र सिंह राणा ने आस्वस्थ किया कि सेवा समिति का उद्देश् ही उत्तराखण्ड के दुर्गम व पिछडे क्षेत्रों में कार्य करते हुये उन लोगों तक विकास की योजना पहुचाना है जो विकास से वंचित हैं। इससे पूर्व भी समिति ने यमुना वैली पब्लिक स्कूल, नौगांव व राजकीय इण्टर कालेज, खरादी में इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन विगत 3 वर्षों से करती आ रही है।
प्रथम एजुकेशन फाउण्डेशन एलायन्स फॉर साइन्स के संयोजक श्री आशुतोष उपाध्याय जी ने बताया कि विज्ञान को भाषा की तरह नहीं बल्कि अनुभव करके सीखा जा सकता है।
कार्यशाला में श्री यशवंत काला, श्रीमती दुग्रेशनन्दनी यादव, श्री सूरत सिंह अधिकारी, श्री दिनेश डोभाल, श्री सरदार सिंह राणा, श्री सुमारी, श्री विरेन्द्र रावत, श्री नारायण राणा तथा प्रथम एजुकेशन की सात सदस्यी टीम ने प्रतिभाग किया।
शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2013
मंगलवार, 1 अक्टूबर 2013
बच्चों ने खेल खेल में सीखे विज्ञान के गूढ़ रहस्य!
- चार दिन की कार्यशाला में ही बच्चे समझने लगे विज्ञान के टेड़े सवाल !!
- विजेन्द्र रावत
नौगाँव (उत्तरकाशी)। में हमारी संस्था
सामाजिक एवं पर्यावरणीय कल्याण समिति (सेवा) ने कक्षा 6 से लेकर 8 तक के
11 स्कूलों के 101 बच्चों के लिए "अनुभव के आधार पर विज्ञान
कार्यशाला" का आयोजन किया। मैं चार दिन के इस शिविर में बच्चों में आये
परिवर्तन पर चकित था . शिविर के पहले दिन गुम शुम से रहने वाले ग्रामीण
स्कूलों से आये बच्चे समापन के दिन जिस बिंदास ढंग से अपने आप को प्रस्तुत
कर रहे थे उससे उनके अविभावक व शिक्षक दोनों ही बेहद खुश दिखे।
कार्यशाला में मॉडल बनाते बच्चे
इस कार्यशाला का आयोजन यूकास्ट, उत्तराखंड, प्रथम एजुकेशन फ़ाउन्डेशन, नई दिल्ली एवं सेवा संस्था (नौगाँव) के संयुक्त प्रयास से किया गया जिसमें
प्रथम के युवा वैज्ञानिकों ने बच्चों को मनोवैज्ञानिक ढंग से खेल खेल में
कंकाल तंत्र, हवाई जहाज की बनावट व अन्तरिक्ष विज्ञान जैसे पेचीदा
रहस्यों को माडल बनाकर बेहद ही सरल ढंग से समझाया और बच्चों ने इस अध्ययन
का खूब लाभ उठाया।इनके माडल बच्चों ने खुद ही तैयार किये व उनके बारे में
सीख कर एक दूसरे में अपना ज्ञान बांटा भी.
बच्चे अपने नर कंकाल मॉडल के साथ
यूकोस्ट के अध्यक्ष डा. राजेन्द्र डोभाल चाहते थे कि विज्ञान की
इस शिक्षा की रोशनी उन दूरदराज के बच्चों तक पहुंचाई जाए जहां हर सुविधा का
घोर अभाव है.
हम भी इस बात को लेकर चिंतित थे कि कैसे यमुना व
टौंस घाटी के सुदूर गाँव फते पर्वत, पंचगाई, बडासू व गीठ जैसे पिछड़े इलाकों
के बच्चों को इस प्रकार की आधुनिक शिक्षा से जोड़ा जाए?
देश भर में अनुभव आधारित विज्ञान की शिक्षा देने वाले प्रथम संस्था के
युवा वैज्ञानिक यहाँ के बच्चों के सीखने की ललक को देखकर अचम्बित थे उनका
मत था कि यहाँ के बच्चों में शहरों के महगें अंग्रेजी स्कूलों के बच्चों से
कहीं ज्यादा प्रतिभा है यदि इनको, उनके मुकाबले आधी सुविधा भी मिल जाए तो
ये उन्हें काफी पीछे छोड़ जायेंगे।
कार्यशाला के बारे में अपने अनुभव बांटता एक छात्र
अब "सेवा" अपने इस अभियान को दूर दराज के स्कूलों तक ले जाने के
अभियान में जुटी है और अब अगला पड़ाव बडकोट, पुरोला, मोरी, जखोल, लिवाड़ी,
राना व खरसाली जैसे दूर दराज के स्कूलों में होगा।
सोमवार, 30 सितंबर 2013
विज्ञान के मॉडल देख चमत्कृत हुए लोग
- दूर-दराज के स्कूलों में भी आयोजित होंगे विज्ञान शिविर
नौगांव। यहां अनुभव आधारित बाल विज्ञान कार्यशाला में बच्चों द्वारा बनाये गये विज्ञान मॉडलों को देखकर उनके शिक्षक व अभिभावक चमकृत हो गये।
छोटे-छोटे स्कूली बच्चों ने चार दिवसीय इस कार्यशाला में कागज के कंकाल तंत्र, फलाइट व स्ट्रोनॉमी (सूर्य, चांद व पृथ्वी) के मॉडल तैयार किये और उसके बाद उन्हें पेंटिंग के रूप में पेंसिल और रंगों की मदद से कागज पर भी उतारा।
इस विज्ञान शिविर का आयोजन सामाजिक एवं पर्यावरणीय कल्याण समिति (सेवा) ने प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन, नई दिल्ली व विज्ञान व तकीनीकी परिषद (यूकोस्ट) के सहयोग से यमुना वैली पब्लिक स्कूल नौगांव में किया गया। इसमें नौगांव के आसपास के 11 स्कूलो के 101 छात्रों ने हिस्सा लिया जो कक्षा 6 से कक्षा 8 तक के हैं।
प्रतिभागी छात्रो का कहना है कि खेल-खेल में विज्ञान को सीखने से हमें पता ही नहीं चलता है कि समय कैसे गुजर गया। उनका कहना था कि यदि इस तरह अन्य विषयों की भी पढ़ाई हो तो कोई बच्चा पढ़ाई में कमजोर नहीं रह सकता।
संस्था के सचिव शशि मोहन रावत ने बताया कि इस प्रकार की कार्यशाला इस पिछड़े क्षेत्र के नैनबाग, बड़कोट, पुरोला, मोरी, जखोल, रानाचट्टी तथा लिवाड़ी-फेताड़ी जैसे दूर दराज के स्कूलों में भी आयोजित की जायेंगी। जहां आज भी पहुंचने के लिए दो दिन का पैदल सफर है।
संस्था के संयोजक एवं वरिष्ठ पत्रकार विजेन्द्र रावत ने यूकॉस्ट उत्तराखण्ड, का आभार वक्त करते हुए कहा कि यूकॉस्ट के अध्यक्ष राजेन्द्र डोभाल ने रवांई-जौनपुर व जौनसार-बावर जैसे पिछड़े क्षेत्रों में बच्चों में विज्ञान प्रतिभा के विकास के लिए एलांयस फॉर साइंस जैसे स्तरीय कार्यक्राम के आयोजन में मदद दी।
प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन, नई दिल्ली के टीम लीडर महेश पोखरिया ने बताया कि यहां के बच्चों में विज्ञान को सीखने की जितनी अधिक जिज्ञासा है उतनी जिज्ञासा शहरों के सुविधा सम्पन्न अंग्रेजी स्कूलों के बच्चों में नहीं है। यही कारण है कि ये अपेक्षाकृत तेजी से सीख रहे हैं। संस्था की योजना है कि इस पिछड़े क्षेत्रों में भविष्य में संस्था विज्ञान मेलों का आयोजन भी करेगी। ताकि छात्रों में विज्ञान के प्रति रूचि पैदा हो सके।
बुधवार, 5 जून 2013
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